तीन दिन से कोहनी और गर्दन पर फिर खुजली शुरू हो गई है।
बरसात की उमस बढ़ते ही ये होता है, हर साल की तरह (फिर वही)।
कल रात तो नींद ही टूट गई, बीच में उठकर मॉइस्चराइज़र लगाना पड़ा।
दफ्तर में एसी लगातार चलता है, त्वचा और रूखी हो जाती है।
सुबह लगाओ, दोपहर में फिर लगाओ, फिर भी (रूखापन) कम नहीं होता।
पच्चीस साल हो गए इस सबके साथ, फिर भी हर बार यही थकान लगती है।
इतना ध्यान रखने के बाद भी मौसम बदलते ही सब वापस आ जाता है, हाहा।
त्यौहारों का सीज़न भी नज़दीक है।
तला-भुना और मीठा देखकर मन तो करता है, पर हाथ रुक जाता है।
थोड़ा और (परहेज़) करना पड़ेगा शायद।
बस आज मन थोड़ा भारी है, इतना ही।
