रात के 12:40 बज चुके थे जब आखिरकार नींद आई।
पिछले कुछ हफ़्तों से यही हो रहा है, हर रात सोने का समय थोड़ा और पीछे खिसक जाता है। दफ़्तर में एक नया प्रोजेक्ट आया है (नींद कम होने की असली वजह शायद यही है), और साथ ही कलाई के पास की त्वचा भी थोड़ी खुरदरी हो गई है। मेरे मामले में तनाव और त्वचा का यह जुड़ाव बार-बार दिखता है, पर सबके लिए ऐसा हो यह ज़रूरी नहीं।
आज का दिन कुछ ऐसा रहा –
– सुबह 6 बजे उठकर दोनों बच्चों को तैयार किया
– दफ़्तर में एक मीटिंग टली, तो दोपहर थोड़ी हल्की रही
– कलाई पर क्रीम 2 बार लगाई, सुबह और सोने से पहले
– शाम की सैर आज नहीं हो पाई, बारिश की वजह से
छोटी बेटी ने पूछा, “मम्मी, हाथ पर यह निशान कैसा है?”
जवाब में बस इतना कहा कि दफ़्तर का काम ज़्यादा हो गया है, कुछ खास नहीं।
पुराना फ़िल्म कैमरा लेकर सोसाइटी के गेट तक गई थी, पर रोल खत्म हो चुका था इसलिए कुछ खींच नहीं पाई। अगली बार नया रोल साथ रखना है।
अभी शुरुआत ही है, तो ज़्यादा उम्मीद नहीं बांधी है। सबको भी नींद देर से आती हो तो बताइएगा, बस रोज़ का हाल यहां लिखती रहूंगी।
