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शरीर का समय ›रोज़ की दिनचर्या

आज आपने जो किया, बस वही लिख दीजिए

सुबह क्या लगाया, शाम को क्या किया — इतना ही काफी है। जिस दिन छूट जाए, उस दिन भी बस “आज नहीं हो पाया” लिख दीजिए। कुछ दिनों में यह अपने आप एक रिकॉर्ड बन जाता है। बाद में पीछे मुड़कर देखने पर “उस वक्त क्या चल रहा था” यह सिर्फ ऐसे नोट्स से ही पता चलता है।

सिर्फ अच्छे दिनों के बारे में लिखना ज़रूरी नहीं है। न कर पाने वाले दिन ज़्यादा हों, तो भी कोई बात नहीं।

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