आज रूटीन में जो हुआ वही लिख रही हूँ –
सुबह उठते ही हाथों पर पानी की जगह सीधे मॉइश्चराइज़र लगाया।
ऑफिस में दोपहर को खुजली अचानक बढ़ गई, टिश्यू से दबाकर बैठी रही, किसी को पता नहीं चला।
शाम को बच्चों का होमवर्क, फिर खाना, अपनी क्रीम सबसे आख़िर में लगी।
रात को कोहनी और गर्दन पर नारियल तेल लगाया, बाकी जगह छोड़ दी।
बड़ी बेटी ने आज पूछा, ‘मम्मी हाथ पर ये दाग कब जाएंगे?’ कुछ जवाब नहीं दिया, बस सिर हिला दिया।
सहेली की शादी पास आ रही है, साड़ी का ब्लाउज़ सिलवाने भेजा, आधी बांह की जगह पूरी बांह करवा दी।
रविवार को पहाड़ी वाले रास्ते पर थोड़ी देर चली थी, पसीना आते ही गर्दन में एकदम जलन शुरू हो गई! वहीं रुककर पानी से धो लिया, फिर ठीक लगा।
शुरुआत है अभी, रूटीन ठीक से बैठा नहीं है, पर लगे रहना है।
