आज सुबह बच्चों को स्कूल भेजा। फिर ऑफिस की कॉल में लगी रही।
बीच में हाथ की खुजली अचानक बढ़ गई। टाइप करते-करते हाथ रोकना पड़ा! मीटिंग में बैठी थी तो चुपचाप सहती रही, उठकर खुजाना मुमकिन नहीं था।
शाम को बच्चों को खाना खिलाया, फिर सुलाया। उसके बाद अपनी क्रीम लगाई। इस बार [हाथ और गर्दन] पर ज़्यादा ध्यान से लगाई, क्योंकि वहीं जलन सबसे ज़्यादा होती है।
वीकेंड की ट्रेकिंग का असर अभी तक है। पसीना निकलते ही खुजली शुरू हो जाती है। अगली बार हल्के कपड़े पहनकर जाऊंगी, ये तय कर लिया है।
एक शादी जल्दी ही है, उसके बाद भी लाइन में और शादियां हैं। भारी लहंगे में पूरा दिन कैसे निकलेगा, सोचकर ही थोड़ा डर लग रहा है।
आज का दिन बस ऐसे ही निकला –
– काम पूरा हुआ
– बच्चे सो गए
– क्रीम लगी
– शादी की चिंता साथ रही
