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शरीर का समय ›रोज़ की दिनचर्या

आज फिर वही खुजली लौटी

भीगे कपड़ों में सुबह का काम आज भी नहीं छूटा, बर्तन धोने से पहले हाथों में साबुन का पानी लगते ही गर्दन के पास और कोहनी की मोड़ पर खुजली शुरू हो गई, वही जगह जो बरसात में सबसे ज्यादा परेशान करती है। नीम और हल्दी का लेप रात को लगाकर सोई थी, सुबह थोड़ी राहत लग रही थी, मगर दोपहर तक फिर वैसे ही खुजली आ गई, समझ नहीं आया कि लेप का असर सच में हुआ था या सिर्फ मन को तसल्ली मिली थी।

ब्लाउज़ का कपड़ा गले से रगड़ खाता है, इसलिए आज ढीले गले वाला सूती कुर्ता पहना, थोड़ा फर्क तो लगा पर पूरा आराम नहीं मिला। बर्तन धोते वक्त दस्ताने पहनने की कोशिश की, बहू ने रखे थे कहीं, ढूंढने में वक्त लग गया तो आधा काम बिना दस्ताने के ही हो गया। हाथ धोने के बाद जो क्रीम घर में थी वही लगा ली, मसाले वाले डिब्बे को आज बेटे से निकलवाया।

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बेटी ने पूछा, “मम्मी आज फिर खुजा रही हो”, तो हंसी में टाल दिया, मगर मन में यही चल रहा था कि अगले महीने शादी में हाथ खुले रहेंगे तो कोई देख कर पूछेगा तो क्या बोलूंगी। रात को सोने से पहले फिर से लेप लगा लिया है, कल सुबह देखेंगे कि यह टिकता है या नहीं।

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