
आज सहेली की शादी का फंक्शन था। सुबह से बच्चों को तैयार करके भेजा, फिर खुद तैयार होने बैठी। नई साड़ी के साथ भारी गहने पहने थे। गले और कलाई पर जल्दी ही (खुजली) शुरू हो गई।
बीच फंक्शन में वॉशरूम जाकर [गहने उतारने] पड़े।
घर आते ही सीधा क्रीम लगाई। थोड़ी देर बाद सूजन कम हुई। ऑफिस का काम भी साथ चल रहा था, क्लाइंट को रिपोर्ट दोपहर में ही भेजी।
– सुबह बच्चों का टिफिन
– दोपहर में क्लाइंट वाला काम
– शाम को शादी का फंक्शन
– रात में क्रीम और मॉइश्चराइज़र
सास बोलीं, ‘गहने उतार क्यों दिए बीच में’। कुछ नहीं बताया, बस बात बदल दी।
अभी रिकवरी शुरू ही की है तो ऐसे मौके संभालना मुश्किल लगता है। अगले हफ्ते फिर एक शादी है, इस बार हल्के गहने ही पहनूंगी।
