
कई दिन से लैपटॉप में गेम खेलते-खेलते क्रीम लगाना भूल गई थी। रात को नींद उड़ी रहती थी, आंखें स्क्रीन पर टिकी रहती थीं, हाथ-पैर में खुजली बढ़ती गई पर ध्यान ही नहीं गया।
आज सुबह नहाने के बाद आईने में देखा तो हाथ पर लाल निशान साफ दिख रहे थे। बस वहीं रुक गई। क्रीम निकाली, धीरे-धीरे लगाई, फिर थोड़ी देर बालकनी में बैठी रही।
परीक्षा की तैयारी भी सामने पड़ी है, किताब खोली पर ध्यान गेम में ही घूमता रहा। मन भी कुछ थका-थका सा लग रहा था। ‘रूटीन’ शब्द अभी अजीब लग रहा है, टूट चुकी थी काफी समय से।
आज बस इतना ही किया – क्रीम लगाई, थोड़ा टहली, गेम बंद रखा शाम तक। कल फिर देखूंगी क्या होता है।
