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शरीर का समय रोज़ की दिनचर्या

आज भी 9 बजे वाली क्रीम

आज लगातार 4 दिन हो गए हैं कि सुबह की क्रीम टाइम पर लगाई है। दुकान अकेले संभालती हूं तो सुबह जल्दी निकलना पड़ता है, इसलिए 9 बजे से पहले ही रूटीन खत्म करने की कोशिश करती हूं। पिछले कुछ महीनों से बैठे-बैठे काम करने की वजह से पोश्चर बिगड़ गया था, गर्दन आगे झुक गई, कंधे भी ऊपर की तरफ खिंचे रहते हैं। इससे स्किन पर भी असर दिख रहा था, खासकर गर्दन के पीछे वाला हिस्सा।

अभी स्टेबल फेज में हूं तो ज्यादा कुछ नहीं करती, बस बेसिक चीज़ें फॉलो कर रही हूं –
– सुबह गुनगुने पानी से ही मुंह धोना
– क्रीम लगाते वक्त गर्दन और कंधों को हल्के हाथ से मसलना
– दिन में एक बार उठकर थोड़ा टहलना

Raindrops on a car window blur the view of tall buildings and a parked white car outside. The scene

दुकान पर पूरा दिन काउंटर के पीछे बैठे रहना पड़ता है, इसलिए बीच-बीच में उठना भूल जाती हूं। कल शाम एक रेगुलर कस्टमर ने पूछा, “आजकल गर्दन ठीक लग रही है क्या”, तो लगा शायद थोड़ा फर्क दिख रहा है।

घर पर वीकेंड पर ब्रेड बेक करती हूं, उससे भी हाथों को थोड़ा आराम मिलता है, आटा गूंथने का अलग मूवमेंट है वो। हिसाब-किताब फिर से लिखना शुरू किया है तो शाम का वक्त उसी में निकल जाता है, स्किन केयर के लिए टाइमर लगाकर याद रखना पड़ता है वरना भूल जाती हूं।

4 दिन हो गए हैं लगातार, यही सोच रही हूं कि इसे आगे भी ऐसे ही खींचना है।

टिप्पणियाँ 2

  • खुशबू09.18

    दिन में एक बार टहलना मुझे कम लगता है, मेरे केस में 2 बार उठे बिना गर्दन का दर्द बढ़ जाता है

  • → खुशबूगुनगुनलेखक09.22

    खुशबू जी, सही कह रही हैं, सबका शरीर अलग रिएक्ट करता है। दुकान अकेले संभालती हूं तो बार-बार उठना मुश्किल होता है, फिर भी थोड़ी देर टहलने से गर्दन को पूरा आराम नहीं मिलता ये मानती हूं। बीच में थोड़ी देर खड़ी हो जाती हूं, गर्दन-कंधे हल्के घुमा लेती हूं। बैठे रहने से दबाव लगातार बनता है, दर्द बढ़ने वाली बात समझ आती है। स्टेबल फेज में हूं इसलिए जोर नहीं देती, बस आदत डालने की कोशिश करती हूं। बाकी सब

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