सुबह से लैपटॉप के सामने बैठी थी। जॉब एप्लीकेशन भरते भरते पीठ अकड़ गई। उठी तो थोड़ी सी सीढ़ी चढ़ते ही सांस फूल गई। ताकत बिल्कुल नहीं बची है शरीर में। कहां से शुरू करूं समझ नहीं आता। पहले वॉक करूं या स्ट्रेचिंग करूं? कुछ पता नहीं है अभी। फिर बालकनी में थोड़ी देर खड़ी रही। हवा अच्छी लग रही थी वहां। हाथ में पेन आया तो डायरी में डूडल बना लिया, ये आदत नहीं छूटती। इस साल किताब पढ़ने का सोचा था, वो आज भी टेबल पर ही पड़ी रही। शाम को कंधे थोड़े घुमाए। ज्यादा देर नहीं हुआ, थक गई जल्दी। स्ट्रेंथ बनने में टाइम लगेगा शायद। धीरे धीरे ही सही, आज इतना हो गया।
सीढ़ी चढ़ते ही सांस फूली
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