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शरीर का समय ›रोज़ की दिनचर्या

आज किताबों की छँटाई शुरू

सुबह उठते ही सबसे पहले पुराने नोट्स का डिब्बा खोला.
कुछ पन्ने तो 10 साल पुराने निकले.
एक शेल्फ खाली करने में ही आधा घंटा लग गया.

फिर पार्ट टाइम वाली शिफ्ट के लिए निकलना था, बीच में ही रोकना पड़ा.
शाम को लौटकर बुनाई वाला बैग उठाया.
ऊन हाथ में आते ही दिमाग थोड़ा हल्का हुआ.

रात को 10 बजे तक बस यही गिनती करती रही कि कल और कितनी किताबें कम करनी हैं.
3 बक्से भर चुके हैं, 4 अभी बाकी हैं.

Textile Texture

आज इतना ही हुआ.

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