दुकान में 2 दिन बहुत भीड़ रही, इस बीच यहाँ कुछ नहीं लिख पाया। आज सुबह खोलने से पहले गर्दन थोड़ी घुमाई, पुरानी आदत फिर पकड़ ली।
दोपहर में रोटी बनाते वक्त कलाई का ध्यान रखा, शुरू से ही सीधी पकड़ी। किसी ने पहले कहा था कि आटा गूंधना भी लिस्ट में डाल दो, आज से वो भी जोड़ दिया।
शाम को दुकान बंद करने से पहले थोड़ी देर टहला, कुर्सी से बार-बार उठकर खड़ा हुआ। आज के 4 काम में से 3 हो गए, बाकी कल पर।
