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शरीर का समय ›रोज़ की दिनचर्या

कागज़ की लिस्ट अब तक चली

पिछले हफ्ते जो लिस्ट वाली बात यहाँ लिखी थी, वो अब भी चल रही है।

रात को सोने से पहले अगले दिन का काम कागज़ पर लिखना, ये धीरे-धीरे आदत जैसा हो गया है।

आज भी रात को वही किया।

पढ़ाई का बचा काम, पार्ट टाइम की आने वाली शिफ्ट, और किताबें छाँटने का बचा हिस्सा, सब कागज़ पर उतार दिया।

दिमाग में सब कुछ घूमते रहने से जो बेचैनी होती थी, वो अब थोड़ी कम लगती है जी।

उस पोस्ट पर किसी ने कमेंट में लिखा था कि दिमाग से बाहर निकाल देना वाकई काम करता है।

सच में वैसा ही महसूस हो रहा है।

लिस्ट बनाने के बाद नींद भी जल्दी आती है, पहले जैसे करवटें नहीं बदलनी पड़तीं।

शाम को बुनाई का सामान निकाला था, पर आज हाथ नहीं लगाया।

Bed Flowers

वो सामान भी बेचने वाले डिब्बे में जाना है, पर अभी मन नहीं हुआ।

बुनाई छोड़ने का अपराधबोध थोड़ा रहा, फिर भी वो काम कल के लिए टाल दिया।

हर काम कागज़ पर उतरते ही मन थोड़ा हल्का हो जाता है।

दिमाग में सब रखने से बेहतर है, कागज़ पर रख देना।

आज का सार इतना ही है।

कमेंट 1

  • मुस्कान10.11

    मैंने भी यही किया था, 10 दिन से नींद जल्दी आती है!

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