सुबह अलार्म बजने से पहले ही आँख खुल गई। बाहर अभी हल्का अंधेरा था, पर तैयार होकर निकल गई। चलते हुए सांस थोड़ी थोड़ी भारी हुई, पर घुटने ने ज्यादा तंग नहीं किया। लौटकर चाय बनाई, फिर दिन के बाकी काम में लग गई।
दोपहर में थोड़ी देर बैठकर नौकरी वाली वेबसाइट फिर खोली। फॉर्म का कुछ हिस्सा भर पाई, बाकी अभी अधूरा पड़ा है। शाम को सोचा था किताब के कुछ पन्ने पढ़ूंगी, पर मोबाइल उठाया तो वही पुराना खेल फिर सामने आ गया।
– सुबह की सैर: हुई
– फॉर्म भरना: आधा
– किताब पढ़ना: नहीं हो पाया
– रात को मोबाइल जल्दी रखना: कोशिश जारी है…
आज बस इतना ही हो पाया। कल फिर उसी समय उठने की कोशिश करूंगी।
