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शरीर का समय ›रोज़ की दिनचर्या

आज एक ही जगह सब हिसाब लिखा

कई दिन से हिसाब की किताब छुआ नहीं था।
आज रात 10 बजे बैठी, एक नोटबुक में सब डाला।

– फीस की किस्त की तारीख
– पार्ट टाइम की सैलरी की तारीख
– बगीचे के बीज-खाद का खर्च
– 3 शादियों का शगुन, अलग-अलग लिखा

पहले सब अलग-अलग जगह था, दिमाग में भी अलग-अलग चल रहा था।
आज एक पेज पर साथ देखा तो महीने का गैप साफ दिखा।

शगुन वाला हिस्सा सबसे भारी निकला।
बगीचे का खर्च छोटा है पर हर हफ्ते जुड़ता है, वो भी लिख लिया।

कल सुबह फीस वाली किस्त की तारीख फिर चेक करूंगी।
आज के लिए इतना ही काफी है।

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