आज टाइमर पर पूरे 6 बार उठी। दुकान में बैठे-बैठे हिसाब लिख रही थी, घंटी बजते ही उठकर दो चक्कर लगा आती। कल जितना भारी नहीं लगा, आज थोड़ा आसान लगा!
शाम को आटा भी गूंधा। इस बार कलाई सीधी रखी, टेढ़ी नहीं की। हाथ में वो लाली नहीं आई जो पिछली बार आई थी।
गर्दन अभी भी थोड़ी अकड़ी हुई है (रात का तकिया बदलना पड़ेगा शायद)। पर आज का दिन कुल मिलाकर ठीक रहा।
हिसाब की कॉपी भी अब तक चल रही है। कल सुबह दुकान फिर जल्दी खोलनी है।
