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शरीर का समय ›रोज़ की दिनचर्या

दिवाली की सफ़ाई में कमर अकड़ी

यहाँ कई दिन से कुछ नहीं लिख पाई। दिवाली पास है तो दुकान में और घर दोनों जगह काम बढ़ गया है। सामान जमाना, लाइट की लड़ी लगाना, दीये धोना, सब एक साथ आ गया।

आज सुबह 7 बजे से घर की सफ़ाई में लगी रही। फ़र्श पोछते-पोछते कमर में अकड़न महसूस हुई, सीधी खड़ी हुई तो तब पता चला। कल रात दुकान में भी देर तक झुक कर डिब्बे जमाती रही, वही असर कर गया लगता है।

हिसाब की कॉपी भी आज फिर खोली। पिछले हफ़्ते का जोड़ बाकी पड़ा था, आज पूरा किया। बैठने का ध्यान आज भी नहीं रहा, कुर्सी पर घंटों बैठी लिस्ट बनाती रही।

शाम को ब्रेड के लिए आटा गूंधा, हाथ ठीक लगा, बस कमर अभी भारी लग रही है। कल से फिर ध्यान रखूँगी, आज तो त्योहार की तैयारी में ही निकल गया।

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