इस हफ्ते ऑफिस में डेडलाइन का दबाव कुछ ज्यादा ही रहा।
शाम को घर आकर बच्चों का काम निपटाते-निपटाते रात हो जाती थी।
गर्दन और हाथ की खुजली रात में ज्यादा बढ़ जाती है, यह इस हफ्ते फिर महसूस हुआ।
सोने का समय भी धीरे-धीरे पीछे खिसकता जा रहा है।
– सुबह जल्दी उठकर कुछ नहीं कर पाई
– शाम का समय पूरा बच्चों और काम में चला गया
– एक रात बच्चों के सोने के बाद पुराना कैमरा लेकर गली में निकल गई
– ठंडी हवा में थोड़ी देर टहलना अच्छा लगा
कैमरे से कुछ खींचा नहीं, बस हाथ में पकड़े रखा।
उस थोड़ी देर के लिए दिमाग खाली सा लगा, हाथ की खुजली का ख्याल भी नहीं आया।
अगले हफ्ते सोने से पहले फोन दूर रखने की कोशिश करूंगी।
समय पर सोना ही फिलहाल सबसे जरूरी लग रहा है।
