बच्चों को सुला के जैसे ही लेटती हूं, हाथ में खुजली शुरू हो जाती है।
दिनभर काम में ध्यान नहीं जाता, रात में जाकर सब महसूस होता है।
ऑफिस से आके खाना बनाना, बच्चों का होमवर्क, फिर सोने से पहले क्रीम लगाना — सब हो जाता है पर अपने लिए वक्त नहीं बचता।
स्किन का ख्याल रखना है ये पता है, बस थकान (बहुत ज़्यादा) होती है कि भूल ही जाती हूं।
वीकेंड पे ट्रेकिंग पे गई थी, पसीना आया तो गर्दन और कोहनी पे लाल निशान बन गए।
वहां अच्छा लग रहा था, लौटके रात भर खुजली।
आजकल दोस्तों की शादियां भी लगी हुई हैं।
क्या पहनूं ये सोचते-सोचते ही परेशान हो जाती हूं, हाथ ढके कपड़े ढूंढने में आधा टाइम निकल जाता है।
घरवाले कहते हैं, “थोड़ा आराम कर लो।”
आराम का मतलब उनके लिए और मेरे लिए शायद अलग है।
बस आज बहुत थकी हुई हूं, इतना ही लिखना था।
