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शरीर का समय ›साप्ताहिक डायरी

फिर वही मानसून वाली खुजली

बारिश शुरू होते ही उमस बढ़ गई है और कोहनी और गर्दन पर खुजली फिर लौट आई है।
रात को नींद बीच में टूट जाती है, हाथ अपने आप वहीं पहुँच जाता है।

दफ्तर में पूरे दिन AC चलता रहता है, स्किन इतनी रूखी हो जाती है कि हर घंटे क्रीम लगानी पड़ती है। लगाओ तो थोड़ी देर ठीक लगता है, फिर वही सूखापन!

त्योहारों का मौसम भी आ गया है। घर में सबके साथ बैठकर मसालेदार खाना, मिठाई, यह सब देखकर मन तो करता है, पर हाथ रुक जाता है। बचना पड़ता है, पर मन नहीं मानता।

इतने सालों से यही सब झेल रही हूँ, फिर भी हर मानसून में वही चक्र दोहराता है। लगता है जैसे कुछ बदला ही नहीं।

बस आज मन थोड़ा भारी है, इसलिए लिख दिया।

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