बारिश का मौसम है तो गर्दन और कोहनी की सिलवट वाली खुजली फिर बढ़ गई थी, सोचा सबको बता दूं, इस हफ्ते हल्दी-नीम का लेप आजमाया, पड़ोस वाली आंटी ने बताया था तो एक बार करके देख लिया, पहले दिन तो सच में थोड़ा आराम लगा, जलन भी कम हो गई थी।
अरे, फिर दूसरे दिन शाम होते-होते वही हाल, फिर से खुजली शुरू हो गई! इस हफ्ते कुल 3 बार लेप लगाया, हर बार वैसा ही हुआ, थोड़ी देर आराम फिर वापस वही तकलीफ।
ब्लाउज़ का कपड़ा गर्दन पर रगड़ता रहता है तो रात में सोते वक्त सबसे ज्यादा दिक्कत होती है, नाती-पोतों को नहलाना, बर्तन-सफाई, मसाले वाला काम, ये सब हाथ से ही करना पड़ता है, पानी-साबुन का असर भी साथ में रहता है, मतलब हाथ को आराम मिलता ही नहीं।
अगले महीने भतीजे की शादी है, हाथ खुले रहेंगे, ये सोचकर मन में थोड़ा टेंशन जैसा रहता है, पर अभी तो अगले हफ्ते लेप की जगह सिर्फ ठंडे पानी से धोकर देखूंगी, कपड़ा भी हल्का सूती वाला पहनना शुरू करूंगी।
