कल रात नींद ठीक से नहीं आई। सुबह उठकर लगा शरीर में बिलकुल जान नहीं है। फिर भी सोचा आज कुछ तो करूं, बस बैठी नहीं रहूंगी। घर के अंदर ही 15 मिनट टहली। पहले वाले दिन जितना नहीं थका, ये अच्छा लगा। शाम को इंटरव्यू की तैयारी करते-करते बीच में थोड़ा डूडल बना लिया, दिमाग थोड़ा हल्का हो गया। किताब भी उठाई पर थोड़ा पढ़कर ही आंख लग गई, ज़्यादा दूर नहीं पहुंच पाई। कल से फिर वही रूटीन ट्राई करूंगी। धीरे-धीरे ठीक है, जल्दी नहीं करनी।
नींद खराब थी फिर भी कोशिश की
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