इस हफ्ते हाथों की हालत फिर बिगड़ गई।
सोमवार से बुधवार तक ऑफिस में लगातार मीटिंग्स रहीं। शाम को घर आकर बच्चों का होमवर्क, खाना, फिर सफाई। रात को क्रीम लगाने का समय ही नहीं मिला।
गुरुवार को एक सहेली की शादी थी। साड़ी पहननी पड़ी, ब्लाउज़ थोड़ा टाइट था। रात 12 बजे तक कलाई और गर्दन पर खुजली इतनी बढ़ गई कि नींद टूट गई।
शुक्रवार सुबह आईने में देखा तो लाल चकत्ते फिर से दिख रहे थे। कुछ हफ्ते पहले जो थोड़ा ठीक हुआ लग रहा था, वो सब वापस आ गया जैसे।
वीकेंड पर पहाड़ जाने का plan था, वो भी कैंसल करना पड़ा। थकान इतनी थी कि घर से निकलने का मन ही नहीं हुआ।
सच कहूं तो कई हफ्तों से यहां कुछ लिख ही नहीं पाई। आज बहुत दिनों बाद बैठी हूं, पर मन हल्का नहीं हो रहा।
अगले महीने अभी 2 और शादियां बाकी हैं। पता नहीं इस बार भी यही सब दोहराया जाएगा या नहीं।
बस थोड़ी थकी हुई हूं, इतना कहना था।
