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शरीर का समय ›साप्ताहिक डायरी

सीढ़ी से चढ़ी, हांफते हुए सही

हफ्ता अजीब सा गया। जॉब हंट का प्रेशर सिर पर चढ़ा हुआ है। ऊपर से स्किन भी अपने हिसाब से चल रही है। ताकत बिल्कुल नहीं बची, समझ नहीं आता कहां से शुरू करूं। इस हफ्ते बस इतना किया कि लिफ्ट छोड़कर सीढ़ी से गई। हांफते हुए पहुंची, पर पहुंची तो सही~। शाम को थोड़ा डूडल बनाया, दिमाग को सुकून मिला~। किताब भी उठाई थी, थोड़े पन्ने पढ़कर नींद आ गई। स्किन का मूड फिलहाल टिका हुआ है, बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं~। अगले हफ्ते सीढ़ी वाला काम रोज करने की सोची है, बस इतना ही।

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