इस हफ्ते पहली बार कुछ शुरू करने की हिम्मत जुटाई। ताकत के नाम पर मुझमें कुछ खास नहीं था, तो सबसे आसान से शुरू किया। लिफ्ट छोड़कर सीढ़ियां चढ़ीं। हमारी बिल्डिंग की 4 मंज़िल, 3 दिन चढ़ीं। हर बार सांस फूल गई पर बीच में नहीं रुकी। जॉब हंटिंग का स्ट्रेस भी साथ-साथ चल रहा है, इसलिए 2 दिन सिर्फ सोचकर रह गई। शाम को स्केच बनाने बैठी तो हाथ भी थोड़े कांप रहे थे, शायद यही कमज़ोरी है जिससे शुरुआत करनी थी। किताब वाला प्लान अभी टाल दिया है, पहले यह हिस्सा सेट कर लूं। अगले हफ्ते सीढ़ियों के साथ हल्की स्ट्रेचिंग भी जोड़ने का सोच रही हूं।
सीढ़ियां चढ़ने का हफ्ता
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