बारिश शुरू होते ही नमी बढ़ गई, कोहनी और गर्दन की खुजली लौट आई।
दफ्तर में AC पूरे दिन चलता रहा, स्किन रूखी हो गई।
डेस्क पर मॉइश्चराइज़र रखा फिर भी बार-बार लगाना पड़ा, वरना हाथ में खुजली शुरू हो जाती।

– घर में मिठाई-पकौड़े बन रहे, नवरात्रि की तैयारी चल रही, पर दूरी बनाए रखी (हर साल यही मुश्किल होती है)
– मसालेदार चीज़ों और डेयरी से भी बचती रही
– शिफ्टिंग के सामान से धूल उड़ी, रात को हल्की खुजली हुई
दादी के ज़माने की बात याद आई, “मौसम बदलते ही त्वचा सबसे पहले बोलती है।”

काम का दबाव भी इसी हफ्ते बढ़ा, महीने का हिसाब बंद करना था, तनाव का असर स्किन पर साफ दिखा।
अगले हफ्ते डेस्क पर ही क्रीम की डिब्बी रखूंगी, भूलने का बहाना अब नहीं चलेगा।
