← सूची

जीवन का समय ›विकास योजना

[आराम] संडे को ट्रेकिंग हुई

आज सुबह पहाड़ी वाले ट्रेल पर निकल गई। हफ्ते भर बच्चों और काम के बीच बस यही टाइम अपना लगता है।

रास्ते में हवा एकदम ठंडी थी। पत्ते अभी गिरने लगे हैं, नीचे बिछे हुए थे। ऊपर पहुंचकर कुछ देर बैठी रही, फोन साइड में रख दिया, कुछ खास सोचा भी नहीं।

नीचे उतरते हुए पैर भारी हो गए थे पर मन हल्का था। घर आकर बच्चों का नाश्ता बनाया, फिर लैपटॉप खोल लिया। शाम तक फिर वही रोज़ वाली भागदौड़ शुरू हो गई।

इन दिनों दोस्तों की शादियां लगातार लगी हुई हैं, वीकेंड भी उन्हीं में निकल जाता है। इस बार बीच में यह छोटा सा ब्रेक मिल गया, अच्छा लगा।

काम के बीच थोड़ी देर के लिए ही सही, बाहर निकलना जरूरी लगता है। अगले वीकेंड भी यही रूटीन रखने का सोच रही हूं। ज्यादा प्लान नहीं, बस चलते रहना है।

कमेंट 2

  • निखार02.25

    फोन साइड में रखकर बैठना, यही (असली सुकून) है ना, मैं भी घर से काम करते हुए बीच में ऐसे छोटे ब्रेक ढूंढती हूं

  • हरियाली02.26

    पत्ते गिरने वाला हिस्सा पढ़कर अच्छा लगा जी. पैर भारी होना समझ आता है, ताकत कम है तो थोड़ा चलने में ही जल्दी थक जाती हूं. आप कितनी दूर तक चढ़ीं, चढ़ाई खड़ी थी या आराम से रास्ता था.

सभी पोस्ट देखें →