आज सुबह मन थोड़ा हल्का लग रहा है। बहुत दिनों बाद पुरानी सहेली से बात हुई। उसकी शादी अगले महीने है। पर कब से मिलने का टाइम ही नहीं निकल पा रहा था।
बच्चों को स्कूल भेजने के बाद थोड़ी फुर्सत मिली। उसी में फोन लगाया। पुरानी बातें निकलीं। बीच-बीच में हंसी भी आई।
तय हुआ – इस वीकेंड मिलेंगे। ज़्यादा नहीं, बस थोड़ी देर साथ।
आज का बाकी दिन कुछ ऐसे निकला –
– सुबह सहेली से बात
– वीकेंड का प्लान फिक्स
– शाम को बच्चों का होमवर्क देखा
– रात को यूं ही अगली ट्रेकिंग वाला रूट याद आया, कब जाना है सोचते-सोचते
काम और घर के बीच ऐसे पल कम ही मिलते हैं। आज का दिन (छोटा ही सही) अच्छा लगा। उम्मीद है वीकेंड वाली मुलाकात टलेगी नहीं।
