काम का कोई ठिकाना नहीं रहता, कभी दिन-रात नहीं थकती, कभी हफ्तों कुछ नहीं होता।
खाली दिनों में सोचती हूं कुछ शुरू करूं, शरीर में ताकत बिलकुल नहीं बची है, सीढ़ी चढ़ते हुए भी सांस फूल जाती है।
घर में रोटी सेंकना और हिसाब-किताब लिखना फिर से शुरू किया है, पर ये तो हाथ-दिमाग का काम है, शरीर की बात अलग है।
उम्र भी अब पहले जैसी नहीं रही, जो भी करूं सोच-समझकर करना है, जल्दबाज़ी में कुछ शुरू करके फिर छोड़ना नहीं चाहती।
चलना ठीक रहेगा या हल्के व्यायाम से शुरू करूं, सुबह का समय बेहतर है या शाम का, समझ नहीं आ रहा।
आप लोगों में से किसी ने ऐसे ही शुरुआत की हो तो बताइए जी, कहां से पकड़ूं ये सिलसिला?
