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जीवन का समय ›विकास योजना

[कला] आज रोल खत्म हुआ

आज सुबह वाला रोल आखिरकार खत्म हुआ।

पिछले 3 हफ्ते से रोज ऑफिस के लिए निकलते वक्त एक फोटो खींचती थी, ज्यादातर मोहल्ले की गलियों की।

गिनती की तो कुल 27 फ्रेम भर चुके थे।

शाम को लैब में रोल जमा कर आई, गुरुवार तक प्रिंट मिलने की बात हुई।

बच्चों को स्कूल भेजने के बाद जो 10 मिनट खाली मिलते हैं, वही समय कैमरे के लिए रखा हुआ है।

काम का दबाव इन दिनों बढ़ा हुआ है, कल रात भी करीब 1 बजे नींद आई।

फिर भी सुबह वाला ये टाइम अभी तक नहीं छूटा है।

मेरे मामले में शायद यही एक आदत है जो भागदौड़ के बीच थोड़ी सांस दे जाती है।

अगला रोल कल से शुरू करूंगी।

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