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जीवन का समय ›विकास योजना

[काम] ऑफिस की बातें घर ना लाने की कोशिश

पिछले 2 हफ्तों से एक चीज़ आज़मा रही हूं।
ऑफिस से निकलने के बाद फोन में जो मैसेज या मेल आते हैं, उन्हें घर पहुंचने तक नहीं खोलती हूं।

पहले हफ्ते में यह ठीक-ठाक चला। 7 दिन में से 5 दिन मैनेज हो गया।
दूसरे हफ्ते में बच्चों के स्कूल का एक मामला आ गया और वहीं से पुरानी आदत लौट आई।

शायद यह सिर्फ मेरे मामले में ही ऐसा हो, पर घर आकर भी दिमाग में ऑफिस की मीटिंग चलती रहती है, यह मेरे लिए सबसे मुश्किल हिस्सा रहा है।
बच्चों के साथ बैठी होती हूं, पर आधा ध्यान कहीं और होता है।
यह उन्हें भी महसूस होता होगा, ऐसा सोचकर थोड़ा अजीब लगता है।

रात को सोने का समय भी इसी बीच पीछे खिसकता गया है।
पहले 10:30 तक सो जाती थी, अभी ज़्यादातर दिन 12 बजे के बाद ही नींद आई है।

एक शाम पुराना फिल्म कैमरा निकाला था, सोचा था बाहर निकलकर कुछ फ्रेम लूंगी, पर उसी दौरान ऑफिस का एक कॉल आ गया और कैमरा वैसे ही पड़ा रह गया।

अभी तक कोई तय तरीका नहीं मिला है जिससे यह लाइन साफ खिंच सके।
अगर किसी को कोई और तरीका मिला हो तो बताइएगा।

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