आज सुबह हिसाब बैठाया। इस सीज़न में अब तक 3 शादियों के कार्ड आ चुके हैं। एक अगले महीने है, दो उसके बाद। हर बार गिफ्ट, कपड़े, आने-जाने का खर्च अलग से जुड़ जाता है।
पिछले हफ्ते तय किया, हर शादी के लिए 2000 रुपए अलग रखूंगी। बाकी महीने के हिसाब में हाथ नहीं लगाऊंगी।
आज पहली बार वो लिफाफा बनाया। पैसे उसमें रख भी दिए।
बच्चों के स्कूल का खर्च भी इसी महीने है। पहले से न सोचा होता तो गड़बड़ हो जाती।
काम से लौटकर रात में यह हिसाब लिखा।
अगली शादी तक यही तरीका अपनाए रखूंगी।
