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जीवन का समय ›विकास योजना

[आराम] सोने का टाइम पीछे खिसकता है

कुछ महीनों से देख रही हूँ कि सोने का टाइम धीरे-धीरे और पीछे खिसकता जा रहा है, पहले रात को जल्दी लेट जाती थी, अब काम खत्म करते-करते बहुत देर हो जाती है।

घर में बहू-बेटे का सारा काम, नाती को सुलाना, बर्तन समेटना, उसके बाद थोड़ी देर मोबाइल पर नौकरी की लिस्टिंग देखने बैठ जाती हूँ, वहीं से टाइम निकल जाता है और नींद उड़ जाती है।

सुबह उठना भी है तो थकन बनी रहती है, दिन भर सुस्ती जैसी लगती है, पर रात होते ही फिर वही चक्कर शुरू हो जाता है।

छोटा सा प्लान बना रही हूँ कि मोबाइल थोड़ा जल्दी साइड में रख दूँ, पर आदत छुट नहीं रही।

जिन्होंने भी अपना सोने का टाइम पीछे से वापस थोड़ा जल्दी किया है, वो कोई आसान तरीका बताएंगे क्या, रोज़ की भागदौड़ में भी टिक सके ऐसा कुछ हो तो साझा कीजिए?

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