पैकिंग करते-करते एक वीडियो वाली बात याद आ गई।
बरसात का मौसम है। नमी बढ़ने से कोहनी और गर्दन पर हल्की खुजली फिर लौट आई है।
घर की सफ़ाई और पैकिंग साथ-साथ चल रही है। आजकल ज़्यादातर पुराना सामान अलग कर रही हूं।
पुरानी अलमारी खोली। लंबे समय से न पहनी हुई ऊनी शॉल और रज़ाई का कवर मिला।
याद आया, एक वीडियो में देखा था कि (पुराना, बिना धुला कपड़ा) धूल और डस्ट माइट जमा कर लेता है। बरसात की नमी में ये और बढ़ जाता है।
उस वक्त बस देखकर छोड़ दिया था। आज सामान हाथ में आया तो बात एकदम साफ़ समझ आई।
रज़ाई का कवर धोकर अलग रख दिया है। शॉल भी निकाल दी है।
पैकिंग के बहाने ऐसी चीज़ें छांटना ठीक ही लगा। वरना ये सब नए घर तक साथ चली जातीं।
काम के बीच में यही एक काम आज पूरा हुआ। बाकी डिब्बे कल के लिए छोड़ दिए हैं।
