एक वीडियो में सुना कि एक्सरसाइज़ शुरू करने से पहले अपनी असली हालत पता होनी चाहिए, वरना पता ही नहीं चलता कि कहां से शुरू करें।
मुझे भी यही दिक्कत थी, ताकत बिल्कुल नहीं है ये तो पता था, पर कहां से शुरू करूं ये समझ नहीं आ रहा था।
वीडियो में एक आसान टेस्ट बताया- दीवार के सहारे घुटने मोड़कर बैठ जाना, जितनी देर टिक सको उतनी देर।
पहली बार टाइमर लगाकर आज़माया तो सिर्फ 12 सेकंड में पैर कांपने लगे।
फ्रीलांस का काम कभी बहुत होता है कभी बिल्कुल नहीं, तो रोज़ का नियम बनाना मुश्किल है।
जब काम कम होता तब ये टेस्ट कर लेती, बिज़ी हफ्तों में छोड़ देती।
2 हफ्ते में 3-4 बार ही कर पाई, फिर भी आखिरी बार 24 सेकंड तक टिक गई।
बहुत बड़ा फर्क नहीं है, पर अपनी सही हालत नंबर में पता चलना ही बड़ी बात लगी।
अब कुछ भी शुरू करने से पहले पहले टेस्ट करके देखती हूं, फिर तय करती हूं।
लंबी पोस्ट के लिए माफी, सोचा नोट कर लूं।

