पिछले हफ्ते ऑफिस के एक वेलनेस सेशन में एक बात सुनी थी, जो अभी तक दिमाग में अटकी हुई है।
टॉपिक था स्ट्रेस और स्किन का कनेक्शन, पर जो पॉइंट सबसे ज़्यादा याद रह गया वो अलग ही था — हम स्ट्रेस में कितनी बार अपने चेहरे को हाथ लगाते हैं, इसका हमें खुद पता नहीं होता।
स्पीकर ने बताया –
– लैपटॉप पर काम करते वक्त हाथ बार-बार गाल या ठुड्डी तक चला जाता है, ज़्यादातर सोच में डूबे हुए
– हाथ से जो गंदगी और बैक्टीरिया चेहरे तक जाता है, वो जलन और ब्रेकआउट की एक वजह बनता है
– इसे रोकने का तरीका डांटना नहीं, बल्कि दिन में एक-दो बार गिनना है कि हाथ कितनी बार चेहरे तक गया
सुनते वक्त लगा था मेरे साथ तो ऐसा नहीं होता।
अगले दिन काम के बीच गिनना शुरू किया तो सिर्फ सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक 11 बार हाथ चेहरे तक गया था, ज़्यादातर डेडलाइन वाले मेल पढ़ते वक्त।
रात को सोने का टाइम भी आजकल अपने आप पीछे खिसकता जा रहा है, कभी 12 तो कभी साढ़े 12 बज जाता है, तो शायद थकान और स्ट्रेस दोनों मिलकर हाथ को वहीं ले जाते हैं, यह सिर्फ मेरा अपना अंदाज़ा है।
सबको शायद यह बात मालूम हो, पर मेरे लिए यह पहली बार था कि इतनी साफ़ तरह से समझ आया।
अगले कुछ दिन गिनती जारी रखने वाली हूं।
