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जीवन का समय ›सीख की नोटबुक

हरकत को हिसाब की तरह लिखना सीखा

बेकिंग वाले दिनों में हाथ जल्दी थक जाता है, ये तो पता था।

पिछले हफ्ते एक टॉक सुना, उसमें एक बात अटक गई – सिर्फ थकान महसूस करने से कुछ पता नहीं चलता, लिखना पड़ता है।

घर का हिसाब-किताब मैंने फिर से लिखना शुरू किया है, खर्चा कहां गया वो सब।

वहीं टॉक में बताया गया कि शरीर की हरकत को भी उसी तरह लिखो, कब हाथ उठाया, कब सीढ़ी चढ़ी, कब बैठ गई थक कर।

मतलब, ताकत नापने के लिए मशीन नहीं चाहिए, बस एक पन्ना चाहिए, ये बात समझ आई।

फ्रीलांस का काम ज़्यादा हो तो दिन भर बैठे रहती हूं, काम कम हो तो घर में आटा गूंधती रहती हूं, दोनों दिनों का हिसाब अलग निकलता है, लिखकर ही पता चला ये।

कहां से शुरू करूं, यही सवाल था मेरा हमेशा।

अब लगता है शुरुआत उठाने से नहीं, लिखने से होती है।

आप लोगों में से किसी ने हरकत को इस तरह हिसाब में लिखा है क्या, कैसे शुरू किया आपने।

लंबा लिख दिया, माफ़ी।

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