पिछले हफ़्ते एक वीडियो देखा जिसमें एक कोच बता रहे थे कि तनाव लगातार बना रहे तो शरीर को रीसेट होने का मौका ही नहीं मिलता।
उसमें एक लाइन अटक गई—
“सिर्फ़ 5 मिनट की वॉक भी उस चक्र को थोड़ा तोड़ देती है”
सुनकर याद आया कि पिछले 2 महीने से दफ़्तर का काम कुछ ज़्यादा ही खिंच रहा है, और उसी दौरान गाल और गर्दन की लाली भी बढ़ी है।
डॉक्टर से मिलना अभी बाकी है, पर तनाव और त्वचा का यह जुड़ाव पहली बार इतना साफ़ सुना।
घर में दो बच्चे हैं, तो दिन में वैसे भी टाइम निकालना मुश्किल होता है।
पर उसके बाद शाम को खाना बनाने से पहले 15-20 मिनट निकालना शुरू किया, पुराना फ़िल्म कैमरा लेकर गली तक टहल आती हूं।
शुरू के 3-4 दिन अजीब लगा, ऑफ़िस का काम अधूरा छोड़कर निकलना सही नहीं लग रहा था।
एक हफ़्ते बाद देखा कि रात को नींद जल्दी आने लगी है, नहीं तो पहले 1 बजे तक फ़ोन में उलझी रहती थी।
लाली अभी भी है, वॉक से पूरी तरह ठीक हो गई हो ऐसा नहीं कह सकती।
मेरे साथ शायद इसलिए काम आया क्योंकि तनाव ही सबसे बड़ा ट्रिगर था, सबके साथ ऐसा हो ये ज़रूरी नहीं।
कैमरा साथ ले जाने से एक फ़ायदा और हुआ, फ़ोन देखने का मन कम होता है।
थोड़ा और लंबा खींचकर देखना है, आगे कैसा असर दिखता है वो फिर लिखूंगी।
