कुछ दिन पहले एक वीडियो देखा था, ताकत कहाँ से बढ़ाना शुरू करें इसी विषय पर।
जिम या भारी एक्सरसाइज़ का नाम सुनते ही डर लगता है मुझे, इतनी ताकत बची ही नहीं है फ़िलहाल।
वीडियो में कहा गया –
“सबसे पहले कुर्सी से बिना हाथ के सहारे उठना-बैठना सीखो, यही सबसे बुनियादी हरकत है।”
सुनकर लगा यानी बहुत मामूली सी बात है, पर करके देखा तो पता चला पैर कांप रहे थे।
अब सुबह काम शुरू करने से पहले यही करती हूं, बीच में रुक भी जाती हूं अगर थकान लगे तो।
अजीब बात है, ब्रेड गूंधते वक्त हाथ की ताकत का अंदाज़ा होता था, पर पैर की ताकत का कभी सोचा ही नहीं था।
फ्रीलांस का काम कभी सिर पर होता है कभी बिलकुल खाली रहती हूं, खाली दिनों में यही करने का मन बनाया है।
गिनती नहीं रखती, बस रोज़ करने की कोशिश करती हूं, हिसाब-किताब की डायरी 2 बारा शुरू की है तो सोचती हूं हरकत की भी डायरी बनाऊं तो शायद टिकेगी
साथियों में से किसी ने ऐसे शुरू किया हो तो बताना, कैसे टिकाया आपने
लंबा हो गया, माफ़ करना
