रात में खुजली क्यों ज़्यादा बढ़ती है, यह बात एक टॉक में सुनी थी। पिछले हफ़्ते हाइकिंग पर गई थी, वहीं रात को यह वीडियो देखा। बताया गया कि शरीर का तापमान जितना बढ़ता है, त्वचा की नसें उतनी सक्रिय हो जाती हैं। एक लाइन याद रह गई –
“जितना गर्म शरीर, उतनी तेज़ खुजली।”

सुनकर लगा, यह तो मेरे साथ हर रात होता है। घर आकर उसी रात कमरे का पंखा तेज़ किया, पतली चादर ओढ़ी।
नींद थोड़ी बेहतर आई। बीच में उठकर खुजलाना भी कम हुआ।
बच्चों को स्कूल भेजने से लेकर ऑफिस तक, दिनभर की थकान में तापमान का ध्यान कभी नहीं आता था। अब सोने से पहले [कमरा ठंडा रखना] याद रखने की कोशिश कर रही हूं।
आगे कुछ शादियां भी हैं, वहां रात देर तक जागना होगा। किसी और को भी रात के तापमान से फ़र्क महसूस हुआ है क्या?
