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जीवन का समय ›सीख की नोटबुक

गिनने की जगह घड़ी देखना सीखा

एक टॉक में सुना कि जिनकी ताकत कम है, उनके लिए गिनती से शुरुआत करना सही नहीं है, टाइम देखकर शुरू करना बेहतर है।

पहले हमेशा सोचती थी 10 बार करूं तभी कुछ हुआ माना जाएगा, पर 3-4 बार से ज़्यादा हाथ में जान ही नहीं टिकती थी, हर बार मन खराब हो जाता।

टॉक में बताया था –
हाथ ऊपर उठाकर बस पकड़े रहो, जितनी देर रुक सको, फिर वही सेकंड लिख लो, अगली बार 1-2 सेकंड बढ़ाना है बस।

कल 14 सेकंड तक टिक पाई, आज सुबह 17 सेकंड हो गया, खुशी गिनती से नहीं, टाइम से थी।

रोटी का आटा गूंधते वक़्त भी यही याद आया, कलाई और कंधे में पहले से थोड़ा ज़्यादा टिकाव लगा।

मतलब छोटी बात है, पर हफ्तों से जो समझ नहीं आ रहा था कि कहां से शुरू करूं, उसका एक रास्ता मिल गया लगा।

लंबा लिख दिया, माफ़ कीजिएगा।

A view through three arched windows showing a rainy outdoor seating area. Outside are metal tables a

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