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जीवन का समय ›सीख की नोटबुक

कुर्सी से उठकर शुरुआत तय करना सीखा

काम बिलकुल नहीं था तो एक टॉक देख ली, ताकत को लेकर।

ट्रेनर बोले- जिसे समझ नहीं आता कहाँ से शुरू करे, वो सीधे एक्सरसाइज़ मत ढूंढे।

पहले देखो रोज़ के काम में क्या बिना दिक्कत हो जाता है।

जैसे कुर्सी से बिना हाथ के उठना, या आटा गूंधते वक़्त हाथ कितनी देर टिका रहता है।

कभी चेक किया है, बिना हाथ के उठकर हो पाता है कि नहीं।

मैंने आज़माया तो पता चला हाथ का सहारा लिए बिना उठना ही मुश्किल हो रहा है।

मतलब यही तो असली नाप निकली।

इतने दिन सोचती रही कहाँ से शुरू करूं, जवाब यहीं था।

अभी वहीं से शुरू कर रही हूँ, बाकी बाद में देखेंगे।

लंबा हो गया, माफ़ करना जी।

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