थोड़े दिन पहले एक वीडियो में बात हुई कि ताकत बिलकुल शुरुआत से बनानी हो तो वो हार नहीं है, वो सिर्फ एक स्टेज है.
पहले लगता था बाकी लोग जहां पहुंचे हैं वहां से खुद को नापूं, अब समझ आया अपने कल से नापना है.

वीडियो में एक क्रम बताया गया-
– पहले हाथ की पकड़ यानी grip चेक करना
– फिर कलाई और कंधे का हिलना-डुलना देखना
– सबसे आखिर में कोर और पैर की बारी आती है
इसमें कोई गिनती या टारगेट नहीं दिया गया, बस दिन-ब-दिन जो फर्क महसूस हो वो नोट करने को कहा गया.
मुझे यह बात सबसे ज़्यादा चुभी कि हम अक्सर शुरुआत को कमज़ोरी मान लेते हैं जबकि वो असल में बस पहला पड़ाव है…
अब यही क्रम याद रखकर धीरे-धीरे कर रही हूं, जल्दी में कुछ नहीं जोड़ रही.
