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जीवन का समय ›सीख की नोटबुक

दफ्तर की सीट बदलने से जो सीखा

बरसात शुरू होते ही कोहनी और गर्दन पर खुजली फिर लौट आई थी.
किसी ऑनलाइन टॉक में स्किन केयर पर बात सुनी, वही अब तक याद है –
‘त्वचा को हवा से ज़्यादा, हवा की सीध से दिक्कत होती है.’
अपनी सीट देखी तो पता चला, ठीक (AC वेंट) के नीचे बैठती थी.
सीट कोने वाली टेबल पर शिफ्ट करवा ली, जहां हवा सीधा नहीं आती.

– गर्दन की खुजली धीरे-धीरे कम हुई
– कोहनी में अभी भी हल्की जलन रहती है
– शाम को घर आकर सूती कुर्ता पहनना भी साथ में रखा है

छोटी सी सीट बदलने वाली बात इतना फर्क डालेगी, ये नहीं सोचा था.
मॉइस्चराइज़र की शीशी अब टेबल दराज में हमेशा रखती हूं.

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