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जीवन का समय ›सीख की नोटबुक

हल्दी-नीम लगाने का असर कितने दिन तक रहा

इस बार बरसात में गर्दन और कोहनी की सिलवट में खुजली फिर से शुरू हो गई है, जहां ब्लाउज़ का कपड़ा रगड़ता है वहीं सबसे ज़्यादा है, बचपन में कुछ साल यही तकलीफ हुई थी फिर लंबे समय तक कुछ नहीं हुआ तो अब अचानक शुरू होने पर समझ नही आया कि क्या करूं।

पड़ोस की एक आंटी ने हल्दी और नीम का लेप लगाने को कहा था, सोचा आज़मा लेती हूं। पहले 2 दिन सच में थोड़ा आराम लगा, लाली भी कम दिखी, खुजली भी कम हुई! लेकिन तीसरे दिन से फिर वही हाल हो गया, उल्टा बर्तन-सफ़ाई के बाद हाथ गीले रहने से और बढ़ गई।

मतलब इससे बस इतना समझ आया कि लेप से कुछ देर के लिए राहत ज़रूर मिल जाती है, पर पानी-साबुन और मसालों से बार-बार वास्ता पड़ते रहने से असर टिकता नहीं है। अब काम के बीच-बीच में हाथ पोंछकर सुखाने की कोशिश कर रही हूं, कितना हो पाएगा पता नहीं…

अगले महीने भतीजे की शादी भी है, वहां हाथ खुले ही रहेंगे, सोचकर थोड़ा घबरा जाती हूं कि कोई दाग देखकर पूछ बैठा तो क्या बोलूंगी। आजकल रात को नींद भी देर से आ रही है, शायद उसी वजह से खुजली रात में थोड़ी ज़्यादा महसूस होती है।

टिप्पणियाँ 1

  • 버티는중09.15

    यही हाल मेरा भी हो चुका है, गर्दन की सिलवट में जब भी पसीना और कपड़े की रगड़ लगातार होती रहे तो खुजली रुकती ही नहीं जी। बरसात के मौसम में मेरे यहां भी यही तकलीफ बढ़ जाती थी, घर पर आटा गूंथने का काम रोज़ करती हूं तो हाथ अक्सर गीले रहते हैं, वही हाल हो गया था कि हल्दी वाला लेप लगाकर थोड़ी राहत तो मिलती पर हाथ फिर पानी में जाते ही सब बेकार हो जाता। कुछ दिन तो ऐसे ही चलता रहा, फिर काम के बीच-बीच हाथ

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