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जीवन का समय ›सीख की नोटबुक

पोस्चर सुधारने वाली क्लास से सीखी बातें

दुकान पर पूरा दिन कुर्सी पर बैठे रहने से पीठ और गर्दन दोनों जकड़ जाती थी, इसी वजह से एक ऑनलाइन क्लास देखी थी जिसमें बैठने के तरीके पर बात हो रही थी, नोट कर लिया था और अब भी उसी हिसाब से चल रहा हूं ।

क्लास में सबसे पहले यही कहा गया था कि कमर सीधी रखने से ज़्यादा ज़रूरी है बीच-बीच में उठना, लगातार बैठे रहना ही असली दिक्कत है, चाहे कुर्सी कितनी भी अच्छी क्यों न हो ।

जो बातें काम की लगीं वो यहां लिख रहा हूं —

Two potted houseplants, a snake plant and a trailing vine, are on a wooden cabinet against a striped

– कुर्सी की ऊंचाई ऐसी हो कि पैर पूरी तरह ज़मीन पर टिकें, घुटने लटके हुए नहीं होने चाहिए
– कमर के पीछे एक तकिया या तौलिया रखने से पीठ का झुकाव अपने आप कम हो जाता है
– मॉनिटर या जो भी देख रहे हों वो आंखों की सीध में हो, गर्दन झुकाकर देखने से ही असली तकलीफ शुरू होती है
– खड़े होकर थोड़ी देर टहलना, बैठे-बैठे स्ट्रेच करने से ज़्यादा असर करता है

पहले लगता था कि बस झुककर न बैठूं तो काफी है, पर क्लास देखने के बाद समझ आया कि असली बात है बीच-बीच में हिलना-डुलना, शरीर को एक ही स्थिति में देर तक मत रखना ।

दुकान में काम करते हुए ये सब लागू करना आसान नहीं, फिर भी जितना हो पा रहा है उतना कर रहा हूं, और पहले से फर्क महसूस हो रहा है ।

कमेंट 3

  • खुशबू09.29

    तकिया वाली तरकीब मैं भी आज से आज़माती हूं!

  • मुस्कान09.29

    पोश्चर ठीक रखने से ज़्यादा मुझे तो लगता है कमर की ताकत कम हो तो असली दिक्कत वहीं से शुरू होती है। मेरे केस में तो तकिया लगाने के बाद भी 20 मिनट बाद फिर झुक जाती थी क्योंकि कमर में दम ही नहीं बचा था।

  • → मुस्कानगुनगुन09.29

    कमर में ताकत कम होने वाली बात से सहमत हूं, दुकान पर पूरे दिन बैठे रहने पर मेरी पीठ भी यही करती है । तकिया लगाकर बैठूं तो थोड़ी देर ठीक रहता है फिर वैसे ही ढीला पड़ जाता है ।

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