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जीवन का समय ›सीख की नोटबुक

आटा गूंधते वक्त कलाई सीधी रखना सीखा

घर पे ब्रेड बनाते हुए हाथ में अक्सर दर्द रहता था, कलाई से शुरू होकर कंधे तक चला जाता था।

पिछले हफ्ते एक बेकिंग वीडियो देखा जिसमें आटा गूंधने का सही तरीका सिखाया गया था। उसमें बताया कि पूरा ज़ोर कलाई पर मत डालो, कोहनी को थोड़ा मोड़कर शरीर का वज़न आगे-पीछे डालो, हाथ तो बस दिशा दिखाता रहे। सुनने में थोड़ा अजीब लगा पर करके देखा।

पहले दिन कुछ खास फर्क नहीं लगा, पर धीरे-धीरे कलाई का दर्द कम होने लगा। और अजीब बात ये कि यही तरीका गल्ले पर बैठते वक़्त भी काम आया — कोहनी ढीली रखने से कंधे पर बोझ खुद ही कम पड़ता है।

छोटी सी बात है, पर जो चीज़ इतने दिनों से परेशान कर रही थी उसमें थोड़ा आराम मिला तो लिखने का मन हुआ।

कमेंट 3

  • खुशबू10.03

    यही दर्द मुझे भी रोटी का आटा गूंधते वक़्त कलाई से शुरू होकर कंधे तक जाता था। कोहनी ढीली रखकर वज़न आगे-पीछे डालने वाली बात पढ़कर लगा जैसे मेरी ही बात लिख दी है जी।

  • खुशबू10.04

    यही तरीका बच्चे को गोद में उठाते वक्त भी काम करता है, (कोहनी ढीली) रखने की आदत अब बना रही हूं जी।

  • खुशबू10.04

    यह कोहनी ढीली रखने वाली बात सच में बहुत काम की निकली जी। पिछले महीने पहाड़ पर ट्रेकिंग पोल पकड़कर चढ़ते वक़्त पूरा (दबाव कलाई पर) पड़ रहा था, और कुछ ही देर में दर्द शुरू हो गया था। फिर यही तरीका याद आया, कोहनी थोड़ी मोड़कर रखी और वज़न शरीर से आगे-पीछे डालने लगी, हाथ को सिर्फ दिशा दिखाने दी। उसके बाद वाली ट्रेकिंग में फर्क साफ दिखा, कलाई का दर्द कम था और हाथ उतना थका हुआ भी नहीं लगा।

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