आज सुबह ड्राइविंग क्लास में सर ने एक बात बताई जो दिमाग में बैठ गई, पीछे से हॉर्न बजते ही मेरा हाथ-पैर एक साथ हिलने लगता है, गाड़ी बंद हो जाती है, फिर से स्टार्ट करने में टाइम लगता है, आज भी 9 बजे वाली क्लास में 3 बार यही हुआ, सर बोले- “हॉर्न सुनते ही पहले क्लच दबाओ, ब्रेक बाद में, गियर मत छेड़ो”, मैं अब तक उल्टा करती थी, मतलब पहले ब्रेक फिर घबराकर क्लच ढूंढती थी, इसी क्रम में गाड़ी बंद हो जाती थी, आज आखिरी राउंड में यही (पहले क्लच, बाद में ब्रेक) ट्राई किया तो गाड़ी बंद नहीं हुई, हाथ अब भी कांप रहे थे पर गाड़ी चलती रही, रात को डायरी में भी यही लिखा कि घबराहट में क्रम बदल जाता है, पहले वाला काम बाद में हो जाता है और बाद वाला पहले, बच्चों के स्कूल से फोन आता है तब भी यही होता है, घबराहट पहले आती है, सोचना बाद में, हाहा अभी तक याद करके हंसी आ रही है कि पहले दिन क्लच की जगह एक्सेलरेटर दबा दिया था, कल फिर क्लास है, आज वाला क्रम लेकर जाऊंगी
हॉर्न बजने पर पहले क्लच दबाना सीखा
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