पिछली बार आटा फूलने के दौरान पंजों पर खड़े होने वाली बात लिखी थी, उस पर किसी ने कमेंट में लिखा था कि बुनाई के बाद हाथ जकड़ जाता है जी।
मुझे क्या कहूं, वो पढ़कर मुझे भी याद आया कि आटा गूंधने के बाद कलाई और उँगलियाँ अक्सर भारी लगती हैं।
तो उसी दिन शाम को एक वीडियो देख लिया, जिसमें बताया गया था कि उँगलियाँ पूरी तरह फैलाकर 5 सेकंड रोकना है, फिर मुट्ठी बंद करके फिर 5 सेकंड रोकना है, ऐसा 10 बार।
अगली सुबह आटा गूंधने के बाद वही किया, रोटी के लिए आटा रखा और वहीं खड़े-खड़े यह कसरत कर ली।
पहली बार में उँगलियाँ पूरी तरह खुलती भी नहीं थीं, जकड़न इतनी थी कि सच में अचरज हुआ!
3 दिन से रोज कर रही हूँ, अभी उँगलियों की जकड़न पहले से कम लग रही है, पर कलाई अभी भी कभी-कभी भारी होती है।
जिन्होंने आटा फूलने में कितना वक़्त लगता है पूछा था, उसके लिए लिख दूँ, गर्मी में करीब 50 मिनट लगता है, ठंड में थोड़ा ज्यादा।
पंजों पर खड़े होना भी साथ में जारी है, दोनों कसरत एक साथ करने में अभी तक कोई परेशानी नहीं हुई।
लंबा लिख दिया, माफ़ कीजिएगा सभी को।
