रात के क़रीब साढ़े ग्यारह बज रहे थे, और मैं रसोई में यूं ही इन चीनी वाले चम्मचों को सजा रही थी।
बेटी ने कल स्कूल प्रोजेक्ट के लिए केक का ऑर्डर दिया है।
पिछले तीन हफ़्तों से सोने का समय लगातार पीछे खिसक रहा है, कभी बारह तो कभी एक बज जाता है।
पर अजीब बात है, आटा-चीनी नापने में बीते ये पंद्रह-बीस मिनट दिनभर के सबसे शांत हिस्से जैसे लगने लगे हैं।
बर्तन की हल्की खनक, चीनी के दानों की चमक, खिड़की से तिरछी आती रोशनी।

दफ़्तर का तनाव दिनभर जैसे शरीर पर चिपका रहता है, पर इस थोड़ी देर के लिए सब भूल जाती हूं।
मेरे मामले में शायद यह सिर्फ थकान से बचने का एक बहाना है, ठीक से पता नहीं।
दोनों बच्चों को संभालते हुए और दफ़्तर का काम भी साथ चलाते हुए, ऐसे छोटे-छोटे पल निकालना कितना मुश्किल होता है, यह शायद वही समझेंगे जो इससे गुज़र रहे हैं।
आप सबमें से भी किसी की रात में ऐसी कोई छोटी आदत है क्या, जो दिनभर की थकान के बाद थोड़ा हल्का महसूस कराए?
फिर मिलती हूं, तब तक के लिए शुभरात्रि।
